Vivah Paddhati Sanskrit Hindi । विवाह पद्धति
| Author | Ram Swarup Merathbale |
|---|---|
| Publisher | Unkown (2000) |
| Categories | Hindu Sanskar, Karmakandam |
| Languages | Hindi, Sanskrit |
| File Size | 15.20 MB |
| Source / Credit | View Original |
Description
विवाह पद्धति एक धार्मिक कर्मकांड ग्रंथ है, जिसे पं. राम स्वरुप मेराठबाले ने तैयार किया है। यह पुस्तक हिंदू विवाह संस्कार को वैदिक परंपरा के अनुसार सरल और व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करती है। इस ग्रंथ का मुख्य उद्देश्य विवाह विधि को शास्त्रसम्मत, सरल और व्यवहारिक बनाना है, ताकि पुरोहित और सामान्य लोग इसे आसानी से समझ सकें। इसमें संस्कृत मंत्रों के साथ उनका हिंदी अर्थ भी दिया गया है, जिससे पाठक को विधि का पूरा ज्ञान हो सके। पुस्तक में विवाह संस्कार की संपूर्ण प्रक्रिया वर्णित है, जैसे मंडप निर्माण, गणेश पूजन, कलश स्थापना, वर स्वागत, कन्यादान, वरमाला, अग्नि स्थापना और सप्तपदी। सप्तपदी में वर और वधू सात वचन लेते हैं, जो उनके दांपत्य जीवन की नींव बनते हैं। विवाह को हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है, जिसका उद्देश्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति के साथ गृहस्थ जीवन की स्थापना करना है। अग्नि को साक्षी मानकर यह संस्कार संपन्न होता है। यह पुस्तक वैदिक संस्कृति, संस्कार और परंपराओं को सुरक्षित रखने का कार्य करती है और विवाह विधि को क्रमबद्ध रूप में समझाती है। इसलिए यह ग्रंथ धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
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