Bhaktamal by Nabhadas - भक्तमाल

Bhaktamal by Nabhadas - भक्तमाल

Nabhadas

Author Nabhadas
Publisher Malook Ganthagar (2016)
Categories Hindi Books, Hindi Sahitya, Hindi Story
Languages Hindi
File Size 118.79 MB
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Description

भक्तमाल केवल एक किताब नहीं, बल्कि हिंदी साहित्य के भक्तिकाल का एक अनमोल रत्न और आधारभूत ग्रंथ है। इसकी रचना संत नाभादास ने लगभग 1585 ईस्वी (विक्रम संवत 1642) में की थी। यह ग्रंथ भारत के विभिन्न कालों, जातियों, और संप्रदायों के भक्तों की जीवन-झलकियाँ प्रस्तुत करता है। यह ब्रज भाषा में लिखा गया है। नाभादास ने इसमें मुख्य रूप से छप्पय छंद और कहीं-कहीं दोहों का प्रयोग किया है। उनकी शैली अत्यंत संक्षिप्त (मंजीरा शैली) है, जिसमें प्रत्येक शब्द गूढ़ अर्थ रखता है। इस ग्रंथ में कुल 200 से अधिक भक्तों (जिनमें पौराणिक, ऐतिहासिक और समकालीन भक्त शामिल हैं) के जीवन चरित्र, उनके सिद्धांतों और भक्ति-भाव का वर्णन है। पौराणिक भक्त: प्रह्लाद, ध्रुव, नारद, जनक, अक्रूर, उद्धव, आदि। शंकराचार्य, रामानुज, कबीर, रैदास, सूरदास, मीराबाई, तुलसीदास, नामदेव, पीपा, धन्ना, सेन, और अपने गुरु अग्रदास सहित समकालीन संत। सामाजिक समरसता का प्रतीक: यह ग्रंथ अपने समय के लिए क्रांतिकारी था। नाभादास ने जाति, वर्ण, लिंग और वर्ग के भेदभाव को पूरी तरह नकार दिया। उन्होंने एक चमार (रैदास), जुलाहा (कबीर), नाई (सेन), जाट (धन्ना) और राजपूत (पीपा) सभी को सम्मानपूर्वक एक ही पंक्ति में बिठाया। यह मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के इतिहास को समझने के लिए सबसे प्रामाणिक और प्रारंभिक स्रोतों में से एक है। कई संतों की जानकारी केवल इसी ग्रंथ से मिलती है। ग्रंथ का मूल संदेश है कि 'भक्त, भक्ति, भगवान और गुरु' ये चारों एक ही सत्ता के विभिन्न रूप हैं, और भक्त अपने भगवान से भी बढ़कर है।

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