Raghuvamsha Mahakavya Of Kalidash | रघुवंशमहाकाव्य PDF

Raghuvamsha Mahakavya Of Kalidash | रघुवंशमहाकाव्य PDF

Kali Das

Author Kali Das
Editor Indra Vidyavachaspati
Publisher Rajpal And Suns (2009)
Categories Hindi Sahitya, Sanskrit Sahitya
Languages Hindi, Sanskrit
File Size 1.20 MB
Source / Credit View Original
Report Issue / Copyright Claim

Description

'रघुवंशमहाकाव्यम्' संस्कृत साहित्य के देदीप्यमान नक्षत्र महाकवि कालिदास द्वारा रचित एक कालजयी और अद्वितीय महाकाव्य है। संस्कृत वास्तुकला और साहित्य में इसे 'महाकाव्यों का सिरमौर' माना जाता है। इस ग्रन्थ में कुल 19 सर्ग हैं, जिनमें भारतीय संस्कृति, आदर्श राजा, त्याग, पराक्रम और उच्च मानवीय मूल्यों का सजीव चित्रण किया गया है। 29 प्रतापी राजाओं का वर्णन: इस महाकाव्य में इक्ष्वाकु वंश (रघुवंश) के आदिपुरुष राजा दिलीप से लेकर महाराजा रघु, राजा अज, चक्रवर्ती दशरथ, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, उनके पुत्र कुश और इस वंश के अंतिम विलासी राजा अग्निवर्ण तक, कुल 29 चक्रवर्ती राजाओं के चरित्र, उनके ऐश्वर्य, प्रजा-रंजन और नैतिक मूल्यों का विशद वर्णन है। राजा रघु का पराक्रम: महाराजा रघु के दिग्विजय और उनके द्वारा किए गए 'विश्वजित यज्ञ' (जिसमें उन्होंने अपना सर्वस्व दान कर दिया था) के कारण ही इस पूरे वंश का नाम 'रघुवंश' पड़ा। कालिदास ने रघु के चरित्र को दानशीलता और शौर्य के शिखर के रूप में उभारा है। कालिदास की उपमाएँ: महाकवि कालिदास अपनी उत्कृष्ट उपमाओं (Metaphors) के लिए संसार भर में प्रसिद्ध हैं। इस ग्रन्थ में शब्द और अर्थ का वैसा ही सुंदर समन्वय देखने को मिलता है, जैसा कि शिव और पार्वती का मिलन है। प्रस्तुत संस्करण का संपादन सुप्रसिद्ध विद्वान इंद्र विद्यावाचस्पति जी द्वारा किया गया है। उन्होंने मूल संस्कृत श्लोकों के साथ-साथ अत्यंत सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी व्याख्या (अनुवाद) प्रस्तुत की है। राजपाल एंड संस (2009) द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक संस्कृत साहित्य के शोधार्थियों, विद्यार्थियों और भारतीय गौरवशाली इतिहास व संस्कृति में रुचि रखने वाले आम पाठकों के लिए एक अत्यंत मूल्यवान संग्रह है।

Comments (0)

Leave a Comment

No comments yet. Be the first to share your thoughts!