Ashtanga Sangraha | अष्टाङ्गसंग्रह

Ashtanga Sangraha | अष्टाङ्गसंग्रह

Vag Bhatta

Author Vag Bhatta
Editor Kabiraj Abhidev Gupta
Publisher Satyabhamabai Pandurang (1951)
Categories Aayurvada, Yoga
Languages Hindi, Sanskrit
File Size 78.11 MB
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Description

आयुर्वेद के प्राचीन एवं प्रामाणिक ग्रन्थों में से एक “अष्टाङ्गसंग्रह” का हिन्दी भाषानुवाद सहित दुर्लभ संस्करण अब शोधार्थियों, आयुर्वेद विद्यार्थियों तथा संस्कृत प्रेमियों के लिए डिजिटल रूप में उपलब्ध कराया गया है। यह ग्रन्थ आयुर्वेदाचार्य वाग्भट द्वारा रचित है और आयुर्वेद के सिद्धान्तों, शरीर विज्ञान, रोग निदान तथा चिकित्सा विज्ञान का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। उपलब्ध संस्करण “सूत्र, शारीर एवं निदानस्थानात्मक प्रथम भाग” है, जिसका हिन्दी अनुवाद प्रसिद्ध आयुर्वेदविद् कविराज अभिदेव गुप्त ने किया है। ग्रन्थ की प्रस्तावना राजवैद्यपण्डित श्री नन्दकिशोर शास्त्री त्रिभुवनाचार्य द्वारा लिखी गई है, जो उस समय राजस्थान के आयुर्वेद शिक्षा विभाग से सम्बद्ध प्रमुख विद्वानों में गिने जाते थे। पुस्तक का प्रकाशन सत्यभामाबाई पाण्डुरंग द्वारा तथा मुद्रण निर्णयसागर प्रेस, बम्बई में किया गया था। उपलब्ध प्रकाशन विवरण के अनुसार यह संस्करण विक्रम संवत् २०१५ (लगभग 1958–1959 ईस्वी) का है। निर्णयसागर प्रेस भारतीय संस्कृत और आयुर्वेद साहित्य के प्रकाशन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए प्रसिद्ध रहा है। अष्टाङ्गसंग्रह आयुर्वेद के आठ प्रमुख अंगों—कायचिकित्सा, शल्य, शालाक्य, कौमारभृत्य, भूतविद्या, अगदतन्त्र, रसायन तथा वाजीकरण—का व्यवस्थित विवेचन प्रस्तुत करता है। हिन्दी अनुवाद सहित यह संस्करण विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि इससे संस्कृत मूल पाठ को समझना अधिक सरल हो जाता है। डिजिटल संरक्षण के इस प्रयास से भारत की प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान-परम्परा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में सहायता मिलेगी। यह ग्रन्थ आयुर्वेद, संस्कृत साहित्य और भारतीय चिकित्सा इतिहास के अध्ययन हेतु एक अमूल्य स्रोत माना जाता है।

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