नाभा दास हिन्दी भक्ति काल के प्रसिद्ध संत, कवि और लेखक थे। वे विशेष रूप से अपनी महान कृति Bhaktamal के कारण प्रसिद्ध हैं। उन्होंने भारतीय संतों और भक्तों के जीवन का सुंदर वर्णन करके भक्ति साहित्य को नई दिशा दी। नाभादास जी का जन्म लगभग 16वीं शताब्दी में माना जाता है। उनके जन्मस्थान के बारे में अलग-अलग मत हैं, परन्तु सामान्यतः उन्हें उत्तर भारत की संत परम्परा से जुड़ा माना जाता है। बचपन से ही उनका मन भक्ति और साधु-संतों की सेवा में लगता था। वे महान संत Agradas के शिष्य थे। गुरु की प्रेरणा से उन्होंने भक्ति मार्ग को अपनाया और संतों के जीवन का अध्ययन किया। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना Bhaktamal है। इस ग्रंथ में उन्होंने अनेक संतों, भक्तों और महापुरुषों के जीवन, गुण और भक्ति का वर्णन किया।