Mahabharat Vol-6 । महाभारत खंड - ६
Description
महाभारत खंड – 6 महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाकाव्य महाभारत का अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक खंड है। यह भाग मुख्यतः कुरुक्षेत्र महायुद्ध के आरंभ और उससे जुड़े निर्णायक प्रसंगों को प्रस्तुत करता है। इसी खंड में धर्म और अधर्म के महासंघर्ष का वास्तविक स्वरूप स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आता है। इस खंड का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष श्रीमद्भगवद्गीता का प्रसंग है, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग का उपदेश देते हैं। जीवन, कर्तव्य, आत्मा और मोक्ष से संबंधित ये उपदेश भारतीय दर्शन की आधारशिला माने जाते हैं। युद्धभूमि में खड़े योद्धाओं के मनोभाव, उनकी दुविधाएँ और दृढ़ संकल्प इस खंड को अत्यंत भावपूर्ण और प्रेरणादायक बनाते हैं। हिंदी और संस्कृत भाषा में प्रकाशित यह संस्करण मूल श्लोकों की प्रामाणिकता को सुरक्षित रखते हुए पाठकों को आध्यात्मिक और दार्शनिक गहराई से परिचित कराता है। यह खंड साधकों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और धर्म-जिज्ञासु पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
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