सम्भोग से समाधि की ओर | SAMBHOG SE SAMADHI KI OR
| Author | Acharya Shri Rajneesh (OSHO) |
|---|---|
| Publisher | unkown (2010) |
| Categories | Hindi Books |
| Languages | Hindi |
| File Size | 2.58 MB |
| Source / Credit | View Original |
Description
महान विचारक और आध्यात्मिक गुरु आचार्य रजनीश (ओशो) की कालजयी कृति 'सम्भोग से समाधि की ओर' (Sambhog Se Samadhi Ki Or) डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एक बार फिर पाठकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। हिंदी साहित्य और आध्यात्मिक श्रेणियों में इस पुस्तक को आज भी सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले विचारों में गिना जाता है। यह पुस्तक ओशो के उन क्रांतिकारी प्रवचनों का संकलन है, जो रूढ़िवादी सामाजिक सोच को चुनौती देते हैं। पुस्तक का मुख्य संदेश मानव जीवन की बुनियादी 'काम-ऊर्जा' (Sexual Energy) को दबाने के बजाय उसे समझने, स्वीकार करने और ध्यान के माध्यम से उच्च चेतना यानी 'समाधि' में रूपांतरित करने का मार्ग दिखाना है। ओशो के अनुसार, दमन विकृति को जन्म देता है, जबकि सजगता और होश से ही ब्रह्मचर्य का वास्तविक उदय होता है। 2.58 MB साइज की यह ई-बुक अब विभिन्न ऑनलाइन पोर्टल्स पर पढ़ने और डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध है। हालांकि ओशो के विचार हमेशा से विवादों और गहन चर्चाओं में रहे हैं, लेकिन जीवन, अध्यात्म और ध्यान को एक नए दृष्टिकोण से समझने के इच्छुक पाठकों और युवाओं के बीच इस पुस्तक की लोकप्रियता आज भी बरकरार है।
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